जिस उम्र में बच्चे कहानियां सुनते हैं, उसी उम्र में शिव नादर स्कूल, गुरुग्राम के कक्षा 1 के छात्र साढ़े छह वर्षीय विराज इसरानी अपनी पहली बाल पुस्तक ‘Leo – The Kind Giant’ के प्रकाशन के साथ लेखक बन गए हैं।
पुस्तक का आधिकारिक विमोचन आज कुंज़ुम बुकस्टोर, जीके II, नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम में किया गया। यह आयोजन बचपन की रचनात्मकता और दयालुता के संदेश को समर्पित था।
विराज ने ‘Leo – The Kind Giant’ की कहानी की कल्पना छह वर्ष की उम्र में की थी। कहानी के केंद्र में लियो नाम का एक सौम्य विशालकाय पात्र है, जो यह संदेश देता है कि दयालु और संवेदनशील होने से दूसरों के साथ-साथ अपने जीवन में भी खुशी आती है। विराज इस संदेश को चार सरल शब्दों में व्यक्त करते हैं: “दयालु बनें। खुश रहें।”
कार्यक्रम में ‘मैजिक ऑफ बुक्स’ की संस्थापक और प्रसिद्ध कहानीकार आंटी नील विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने विराज की इस उपलब्धि की सराहना की और बच्चों को कहानी सुनने व लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर परिवार, मित्र और शिक्षक भी मौजूद रहे। विराज के माता-पिता डॉ. कृति इसरानी और दुष्यंत इसरानी ने इस सफलता का श्रेय शिव नादर स्कूल, गुरुग्राम के प्रोत्साहनपूर्ण माहौल और शिक्षकों को दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल ने विराज को अपनी कल्पना को अभिव्यक्त करने का आत्मविश्वास दिया।
विराज के लिए यह पुस्तक केवल एक किताब नहीं, बल्कि दूसरे बच्चों तक दयालुता का संदेश पहुंचाने का माध्यम है। वह चाहते हैं कि बच्चे समझें कि दयालुता का एक छोटा कार्य भी बड़ा बदलाव ला सकता है।





