दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी: जहांगीरपुरी में हत्या और दंगे का मुख्य आरोपी 7 साल बाद गिरफ्तार

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के उत्तर-पश्चिम जिला की स्पेशल स्टाफ टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पिछले सात वर्षों से फरार चल रहे एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी साल 2019 में जहांगीरपुरी इलाके में हुए एक सनसनीखेज हत्या और दंगे के मामले में मुख्य वांछित था। पुलिस की आंख में धूल झोंककर वह लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदल रहा था, लेकिन आखिरकार कानून के लंबे हाथों ने उसे दबोच लिया।

यह पूरी कार्रवाई उत्तर-पश्चिम जिला के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-I सिकंदर सिंह के कुशल नेतृत्व में अंजाम दी गई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 27 वर्षीय सिद्धार्थ उर्फ टन्ने (पुत्र प्रताप उर्फ हरीश उर्फ सतीश) के रूप में हुई है, जो जहांगीरपुरी के EE-ब्लॉक का ही रहने वाला है। वह साल 2019 से पुलिस की रडार पर था।

क्या था पूरा मामला?

मामला 10 जून 2019 का है, जब जहांगीरपुरी थाने में हत्या, दंगा फैलाने और गैर-कानूनी रूप से भीड़ इकट्ठा करने की धाराओं (FIR No. 279/2019, U/s 302/147/149/34 IPC) के तहत एक मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान इस वारदात में सिद्धार्थ उर्फ टन्ने की मुख्य संलिप्तता पाई गई थी। हालांकि, वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी दिल्ली से फरार हो गया था और तब से लगातार अपनी गिरफ्तारी से बच रहा था।

सीक्रेट इंफॉर्मेशन पर पुलिस ने बिछाया जाल

बीती 4 जून 2026 को स्पेशल स्टाफ के हेड कांस्टेबल हरीश और हेड कांस्टेबल विकास ढाका को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली कि यह वांटेड अपराधी गुपचुप तरीके से वापस जहांगीरपुरी इलाके में आ गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत जाल बिछाया, इलाके में खुफिया निगरानी बढ़ाई और एक सटीक टारगेटेड ऑपरेशन चलाकर सिद्धार्थ उर्फ टन्ने को घेरकर दबोच लिया। कड़ाई से पूछताछ और वेरिफिकेशन के बाद उसकी पहचान की पुष्टि हुई।

पहचान छिपाने के लिए अपनाए हथकंडे, बदलता था हुलिया

पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि पुलिस से बचने के लिए वह दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। वह अपनी पहचान छिपाने के लिए हमेशा टोपी, गमछा पहनता था और हुलिया बदल लेता था। पकड़े जाने के डर से उसने कभी कोई पक्का मकान किराए पर नहीं लिया, बल्कि मंदिरों, गुरुद्वारों और रैन बसेरों में रातें गुजारता था। इस दौरान उसने शादी कर अपना परिवार भी बसा लिया, लेकिन अपने पैतृक घर से संपर्क नहीं रखा।

दिन में मजदूरी और रात के अंधेरे में घर वापसी

आरोपी ने बेहद साधारण और गुमनाम जीवनशैली अपना ली थी ताकि किसी को शक न हो। वह दिन के समय दिल्ली-एनसीआर में दिहाड़ी मजदूरी करता था। उसे लगा था कि 7 साल बीत जाने के बाद अब पुलिस उसकी तलाश छोड़ चुकी होगी। इसी मुगालते में उसने हाल ही में सिर्फ रात के वक्त चोरी-छिपे अपने घर आना शुरू किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस की सतर्कता और निरंतर प्रयासों ने उसके इस शातिर खेल का अंत कर दिया।

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