नई दिल्ली: दिल्ली के गृह मंत्री श्री आशीष सूद ने हाल ही में हुए हादसों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का ऐलान किया है। एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और नियमों को ताक पर रखने वाले भवन मालिकों को बख्शा नहीं जाएगा।
गृह मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन घटनाओं को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस आपातकालीन बैठक का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार और लापरवाही पर नकेल कसना तथा एक ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है, जिससे भविष्य में ऐसे हादसों को हमेशा के लिए रोका जा सके। सरकार इस संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है।
अब डीएम (DM) तय करेंगे अधिकारियों की जवाबदेही
दिल्ली में एमसीडी, डीडीए, फायर, बिजली और पुलिस जैसे विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण अक्सर फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं हो पाता था। इस खामी को दूर करने के लिए दिल्ली सरकार ने जिला मजिस्ट्रेटों (DMs) को केंद्रीय भूमिका सौंपने का फैसला किया है। अब डीएम अपने क्षेत्र में किसी भी विभाग के अधिकारी की जवाबदेही तय कर सकेंगे। उनके पास दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने, कारण बताओ नोटिस जारी करने और जरूरत पड़ने पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के सीधे अधिकार होंगे।
जेल की सजा और अधिकारियों की संपत्ति से होगी वसूली
सरकार डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 (DDMA Act) के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने जा रही है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले आवासीय या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों को एक साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, यदि किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही या भ्रष्टाचार के कारण जान-माल का नुकसान होता है, तो उसकी सैलरी, पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स रोक दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, सरकार नुकसान की भरपाई उस अधिकारी की निजी संपत्ति से करेगी।
जिला स्तर पर बनेगी जॉइंट कमेटी, बिना लाइसेंस वाले होंगे सील
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए जिला मजिस्ट्रेटों (DM) की अध्यक्षता में एक संयुक्त समिति (Joint Committee) का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस, बिजली कंपनियों (DISCOMs) और एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह टीमें अपने-अपने इलाकों में गेस्ट हाउस, होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉलों का औचक निरीक्षण करेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले या बिना फायर सेफ्टी लाइसेंस के चल रहे प्रतिष्ठानों को तुरंत सील कर दिया जाएगा।
G+4 से ऊपर के भवनों की होगी समीक्षा
गृह मंत्री आशीष सूद ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि दिल्ली में स्वीकृत सीमा ‘जी+4’ (ग्राउंड + चार मंजिल) से ऊपर हुए सभी निर्माण कार्यों की तुरंत समीक्षा की जाएगी। स्वीकृत बिल्डिंग प्लान का उल्लंघन कर बनाई गई किसी भी अवैध इमारत को तुरंत सील किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं देगी और नागरिकों की सुरक्षा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।






