दो साल में मणिपुर पर प्रधानमंत्री मात्र 36 सेकेंड बोले, उन्हें विदेश जाने का समय है, पर मणिपुर जाने का नहीं है- संजय सिंह

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  • केंद्र ने मणिपुर में शांति बहाली के लिए मुख्यमंत्री को हटाने की विपक्ष की सलाह पहले नहीं मानी, लेकिन बाद में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा- संजय सिंह
  • मणिपुर का मुद्दा उठाने पर मुझे 11 महीने तक संसद से निलंबित रखा गया, लेकिन हम देश के जायज व जरूरी मुद्दे उठाना नहीं छोड़ेंगे- संजय सिंह
  • जहां डबल इंजन की सरकारें हैं, वहां लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं, होली, दिवाली, रामनवमी, ईद का त्यौहार आते ही उत्तर प्रदेश में बवाल शुरू हो जाता है- संजय सिंह
  • केंद्र सरकार को सुझाव, मणिपुर के लोगों का विश्वास जीतें और चुनाव कराकर वहां लोकतंत्र की बहाली की जाए- संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने मणिपुर के मुददे पर केंद्र सरकार को सदन में जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मणिपुर पर 2 साल में मात्र 36 सेकंड बोले हैं। उन्हें विदेश जाने का तो समय है, लेकिन मणिपुर जाने का समय नहीं है। पिछले दो साल से मणिपुर में दंगे-फसाद व हिंसा हो रही है। विपक्ष ने केंद्र को मणिपुर के मुख्यमंत्री को हटाने की सलाह दी थी, लेकिन तब बात नहीं मानी गई। आखिरकार वहां राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में डबल इंजन की सरकारें हैं, वहां लड़ाई-झगड़े और फसाद हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी डबल इंजन की सरकार है। जब भी होली, दिवाली, रामनवमी, ईद का त्यौहार आता है, वहां 10 दिन पहले से ही बवाल शुरू हो जाता है। केंद्र को सुझाव है कि मणिपुर के लोगों का विश्वास जीते और चुनाव कराकर वहां लोकतंत्र को बहाल करे।

सांसद संजय सिंह ने कहा कि मणिपुर हिंसा पर जब मैंने अपना विरोध दर्ज कराया था, तो सदन से 11 महीने तक निलंबित रखा गया। मुझे लगता है कि हिंदुस्तान के संसदीय इतिहास में कोई सदस्य अगर सबसे लंबे समय तक निलंबित रहा है, तो वह मैं रहा हूं। क्योंकि मैंने मणिपुर का मुद्दा उठाने का प्रयास किया था, ताकि सदन वहां के लोगों का दर्द सुन ले और उनकी तकलीफों का कुछ समाधान निकाले। मेरी गलती यह थी कि मैं नारा लगाते हुए सदन में बेल के अंदर चला गया था। मुझे पहले एक सत्र के लिए निलंबित किया गया। लेकिन सत्र के अंतिम दिन निलंबन की अवधि बढ़ा दी गई। हमें 11 महीने सस्पेंड करें या मार्शल से बाहर फेंकवा दें, कोई चिंता की बात नहीं है। आप सत्ता में हैं, कुछ भी कर सकते हैं।

संजय सिंह ने कहा कि अगर देश के जायज मुद्दे हैं और अगर देश का कोई हिस्सा जल रहा है, वहां दंगे-फसाद, लड़ाई और झगड़े हो रहे हैं, तो इस सदन का सदस्य होने के नाते हम उस मुद्दे को एक नहीं, हजार बार उठाएंगे। कंेद्रीय गृहमंत्री वहां गए थे और 10-15 दिन वहां की स्थितियों का जायजा लेकर वापस आए थे। इसके बाद गृहमंत्री ने सर्व दलीय बैठक बुलाई थी और सर्व दलीय बैठक में भी दलों ने अपनी राय दी थी। ज्यादातर विपक्ष के मित्रों की यह सलाह थी कि मणिपुर के मुख्यमंत्री वहां की हिंसा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उनको हटाया जाए। जब तक मुख्यमंत्री रहेंगे, वहां शांति की बहाली नहीं हो सकती। यह सुझाव सभी विपक्षी दलों की तरफ से दिया गया था। हमने बार-बार कहा था कि अगर हिंसा कराने वाले के हाथ में ही राज्य की बागडोर रहेगी, तो किसी भी हालत में वहां शांति की बहाली नहीं हो सकती।

संजय सिंह ने कहा कि कुकी और मैतेई के बीच झगड़ा है। उनके बीच शांति का प्रयास वही व्यक्ति कर सकता है, जो शांति की मंशा रखता हो। मणिपुर ने ऐसे दृश्य और वारदातें देखी। वहां चर्च व मंदिर जलाए गए। लोगों की हत्याएं हुईं, उनके घर जलाए गए। उस दिन पूरे हिंदुस्तान के लोगों का सिर शर्म से झुक गया, जब एक कारगिल योद्धा की पत्नी को निर्वस्त्र करके घुमाया गया। उस कारगिल योद्धा ने बयान दिया कि देश की सुरक्षा व रक्षा के लिए मैंने कारगिल की लड़ाई लड़ी, भारत माता को बचाया, लेकिन अपनी पत्नी को नहीं बचा पाया। यह हम सबके लिए शर्मिंदगी, पीड़ा और दुख का विषय है। संसद में प्रधानमंत्री ने दो सालों में मणिपुर पर मात्र 36 सेकंड बोला और संवेदना जताई थी। इसके अलावा उन्होंने मणिपुर के बारे में बात करना भी उचित नहीं समझा, जाना तो बहुत दूर की बात है। दो साल में प्रधानमंत्री को अमेरिका, दुबई, कतर, मंगोलिया समेत दुनिया के तमाम देशों में जाने की फुर्सत है, लेकिन मणिपुर जाने की फुर्सत नहीं है। इसके पीछे क्या कारण मणिपुर के लोगों को बताना चाहते हैं? मणिपुर के लोग कैसे यकीन करें कि भारत के सबसे बड़े अभिभावक, प्रधानमंत्री उनके दर्द में साथ खड़े हैं?

संजय सिंह ने कहा कि राज्यों के प्रति आपका अलग-अलग रवैया रहता है। जहां विपक्ष की सरकारें हैं, उनके साथ भेदभाव होता है। यह समझा जा सकता है। लेकिन जिस राज्य में आपकी डबल इंजन की सरकार है, वहां आपकी दोहरी जिम्मेदारी सुरक्षा, रोजगार और राज्य व किसानों के विकास की है। लेकिन जहां इनकी डबल इंजन की सरकारें है, वहां यह लड़ाई, झगड़े, फसाद कब रुकेंगे? उत्तर प्रदेश की हालत देख लीजिए। होली, दिवाली, रामनवमी, ईद या कोई त्यौहार आता है तो उत्तर प्रदेश में 10 दिन पहले से ही बवाल शुरू हो जाता है। इससे ये लोग क्या हासिल कर लेंगे? पिछले दो साल से मणिपुर में दंगे, फसाद, हिंसा, नफरत, लड़ाई-झगड़े चल रहे हैं, वहां अंततः केंद्र को राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। 2024 में जब ये लोग मणिपुर की दोनों लोकसभा सीटें हार गए, तब समझ आया कि कुछ सुधार और राजनीतिक सत्ता में परिवर्तन की जरूरत है। इसके बाद मुख्यमंत्री को हटाकर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार मणिपुर के लोगों का विश्वास जीते। पिछले दो साल से दो समुदायों के बीच बिगड़ा हुआ भाईचारा और सहमति बहाल करने की कोशिश की जाए और चुनाव कराकर वहां लोकतंत्र की बहाली की जाए।

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