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दिल्ली की एक अदालत ने 26 साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो CBI के दो अधिकारियों को भारतीय राजस्व सेवा IRS के अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल पर अवैध छापेमारी और हमले के लिए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है।
तीस हजारी कोर्ट के judicial magistrate first class शशांक नंदन भट्ट ने इन अधिकारियों को आपराधिक अतिचार और मारपीट का दोषी पाते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने अपने आधिकारिक अधिकारों का दुरुपयोग किया और पेशेवर रंजिश निकालने के उद्देश्य से ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ के साथ यह कार्रवाई की थी।

यह मामला 19 अक्टूबर 2000 की सुबह का है, जब सीबीआई की एक टीम सुबह करीब 5:30 बजे शिकायतकर्ता अशोक अग्रवाल के आवास का दरवाजा तोड़कर जबरन अंदर घुस गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की, उनके परिवार के सदस्यों को बंधक बनाया और उन्हें अपर्याप्त कपड़ों में बेहद गरिमाहीन तरीके से गिरफ्तार किया।

हालांकि आरोपी अधिकारियों ने बचाव में तर्क दिया कि यह छापेमारी आय से अधिक संपत्ति की जांच का हिस्सा थी और उन्होंने केवल कर्तव्य पालन किया, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि जबरन घर में घुसने का कोई उचित कारण नहीं था और यह कार्रवाई केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश को विफल करने के लिए की गई थी, जिसमें श्री अग्रवाल के निलंबन की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने आगे टिप्पणी की कि अधिकारियों की यह कार्रवाई जानबूझकर की गई थी ताकि शिकायतकर्ता को कैट के आदेश का लाभ न मिल सके और उन्हें उन जांचों में उलझाए रखा जा सके जिनमें वे अंततः दोषमुक्त हो गए। मुख्य दरवाजा तोड़ना और बिना किसी ठोस कारण के संपत्ति में प्रवेश करना आपराधिक अतिचार की श्रेणी में माना गया। आदेश पारित होने के बाद मीडिया से बात करते हुए, अशोक कुमार अग्रवाल की ओर से पेश हुए वकील शुभम असरी ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे कानून के शासन की जीत बताया। देखिए टोटल खबरें की विशेष रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के वकील ने मीडिया से बात कर हुए क्या कहा।

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