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सिद्धि फिलैंथ्रोपिक फाउंडेशन द्वारा जौनापुर स्थित हनुमान मंदिर के समीप एक उपेक्षित स्थल का संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं स्वच्छता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। यह स्थान लंबे समय से उपेक्षित था तथा वहाँ लोगों द्वारा कचरा फेंका जाता था। सिद्धि ने इस स्थान को अपनाकर उसकी सफाई, संरक्षण, आवश्यक व्यवस्थाएँ तथा पौधारोपण का कार्य करवाया और इसे एक स्वच्छ एवं प्रेरणादायक स्थान के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर सिद्धि की संस्थापिका, आध्यात्मिक गुरु एवम् मार्गदर्शिका गुरु माँ, जिन्हें स्नेह एवं श्रद्धा से “MeeMaa” कहा जाता है, के संदेश को साझा किया गया। पिछले लगभग 30 वर्षों से MeeMaa सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्थान के विभिन्न कार्यों के माध्यम से समाज को प्रेरित करती रही हैं। उन्होंने आध्यात्मिकता को केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित न रखकर उसे सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा है। उनके मार्गदर्शन में अनेक स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से विभिन्न सेवा कार्यों में योगदान दे रहे हैं।

इस अवसर पर “संकल्प से सिद्धि” के भाव को प्रमुखता से रखा गया। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल सरकारी व्यवस्थाओं पर निर्भर रहने से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने से संभव है।
यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, गली, पार्क, सड़क अथवा अपने आसपास के केवल 10, 100 या 1000 वर्ग फुट क्षेत्र की जिम्मेदारी भी ले ले, तो पूरे समाज का स्वरूप बदल सकता है। स्वच्छता केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि जागरूकता, अनुशासन और उत्तरदायित्व का विषय है। इसी भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस स्थल को अपनाकर उसका संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया गया।

MeeMaa ने अपने संदेश में कहा:

सच्ची आध्यात्मिकता का अर्थ है स्वयं और अपने आसपास की जिम्मेदारी लेना।”

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा, प्रार्थना या व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं है। जब व्यक्ति अपने परिवार, समाज, पर्यावरण और सार्वजनिक स्थलों के प्रति उत्तरदायित्व निभाता है, तभी आध्यात्मिक मूल्यों का वास्तविक रूप प्रकट होता है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक है कि हम शिकायत करने के बजाय समाधान का हिस्सा बनें।

सिद्धि फिलैंथ्रोपिक फाउंडेशन ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने घर, मोहल्ले, पार्क, सड़क या किसी भी सार्वजनिक स्थान के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करें तथा स्वच्छ और सुंदर समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।

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