नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026: दिल्ली सरकार के ‘सीएम श्री’ (CM Shri) विद्यालयों के प्रतिभाशाली छात्रों का दूसरा दल शनिवार को जर्मनी और जापान की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक यात्रा के लिए रवाना हो गया। दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देकर और उनका उत्साहवर्धन करते हुए इस दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वैश्विक शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, उद्योग-उन्मुख कौशल और करियर के बेहतरीन अवसर प्रदान करने की दिशा में दिल्ली सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है।
एपीएएल (APAL) कार्यक्रम से खुले वैश्विक अवसरों के द्वार
शिक्षा मंत्री कार्यालय के अनुसार, दिल्ली सरकार की इस अंतरराष्ट्रीय पहल APAL (एपीएएल) कार्यक्रम का दायरा साल-दर-साल तेजी से बढ़ रहा है।
- पिछले वर्ष इस कार्यक्रम के तहत दिल्ली सरकार के स्कूलों के 14 छात्र जर्मनी गए थे।
- इस वर्ष इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और 24 विद्यार्थी जर्मनी के लिए रवाना हुए हैं।
जर्मनी में मिलेगा सवेतन व्यावहारिक प्रशिक्षण और वजीफा
जर्मनी जाने वाला विद्यार्थियों का यह समूह वहां की प्रसिद्ध ‘ड्यूल वोकेशनल ट्रेनिंग प्रणाली’ (Dual Vocational Training System) के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करेगा। जर्मन भाषा और अंतर-सांस्कृतिक (Inter-cultural) प्रशिक्षण पूरा करने के बाद छात्र 2 से 3.5 वर्ष की अवधि का कोर्स करेंगे। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें थ्योरी की पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में सवेतन (Paid) व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा, जिससे छात्रों को हर महीने वजीफा (Stipend) प्राप्त होगा।
जापान और जर्मनी के शीर्ष विश्वविद्यालयों में मिली स्कॉलरशिप
इस दल में शामिल कई अन्य छात्रों ने अपनी प्रतिभा के बल पर वैश्विक स्तर पर छात्रवृत्तियां हासिल की हैं:
- जापान: 2 विद्यार्थियों को जापान के प्रतिष्ठित फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति मिली है। इसके अलावा 2 छात्रों को जापान सरकार की प्रसिद्ध MEXT स्कॉलरशिप प्रदान की गई है।
- जर्मनी: 1 विद्यार्थी ने जर्मनी के विश्व प्रसिद्ध RWTH आखेन विश्वविद्यालय (RWTH Aachen University) में प्रवेश हासिल किया है।
“विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाना प्राथमिकता”: आशीष सूद
रवानगी के समय शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने छात्रों से बातचीत की और कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की भाषा दक्षता, तकनीकी कौशल और वैश्विक मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बच्चे विदेश जाकर देश का नाम रोशन करेंगे और यह पहल उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगी।









