उत्कल बिपन्न सहायता समिति, भुवनेश्वर में दिल्ली की प्रख्यात लेखिका एवं समाजसेविका डॉ. शोभा विजेन्द्र द्वारा रचित पुस्तक “शतायु संघ और महिला सहभागिता” पर एक गरिमामय संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वंदे मातरम् गायन से हुआ।
कार्यक्रम में ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती सुरमा पाढ़ी मुख्य अतिथि रहीं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, ओडिशा की उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. स्मरप्रिया मिश्रा सम्मानित अतिथि, भारतीय स्त्री शक्ति की राष्ट्रीय सहसचिव श्रीमती चंदना दास ने अध्यक्षता की, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के राष्ट्रीय सह संयोजक एवं प्रांत संघचालक श्री मनसुख सेठिया विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ. शोभा विजेन्द्र ने कहा कि संघ में महिलाओं की भूमिका को लेकर भ्रांतियां फैलाई गई हैं। 1936 में वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर और डॉ. हेडगेवार जी के संवाद से राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना हुई। संघ में नारी परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की धुरी है।
प्रो. मिश्रा ने कहा कि नारी संस्कारों की वाहक है। श्रीमती चंदना दास ने पुस्तक को महिला योगदान का जीवंत दस्तावेज बताया। श्री सेठिया ने कहा कि शाखाएं अलग होना कार्यपद्धति है, सहभागिता में भेद नहीं।
मुख्य अतिथि श्रीमती पाढ़ी ने कहा कि यह पुस्तक 34 से अधिक महिलाओं के अनुभवों के साथ महिला सहभागिता की व्यापक तस्वीर पेश करती है और भ्रम का तथ्यपूर्ण उत्तर देती है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।




