दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने असम विधानसभा अध्यक्ष से की शिष्टाचार भेंट

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नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026 : दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा परिसर में असम विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री रणजीत कुमार दास से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों अध्यक्षों ने राज्य विधानसभाओं की बदलती भूमिका, विधायी आधुनिकीकरण, सतत विकास तथा संसदीय विरासत के संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दौरे के दौरान दोनों अध्यक्षों ने दिल्ली विधानसभा के युवा संपर्क कार्यक्रम के अंतर्गत केशव महाविद्यालय के Gen Z विद्यार्थियों से भी संवाद किया और उन्हें वरिष्ठ विधायी नेतृत्व के साथ सीधे संवाद करने तथा अपने प्रश्न रखने का अवसर मिला।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत के लोकतंत्र और विकास के भविष्य को आकार देने में Gen Z की भूमिका निर्णायक होगी तथा युवा नागरिकों को विधायी संस्थाओं के और करीब लाने की आवश्यकता है। श्री गुप्ता ने कहा, “जब युवा अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को समझते हैं, प्रश्न पूछते हैं तथा जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ सार्वजनिक जीवन में भागीदारी करते हैं, तब लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है। Gen Z केवल हमारे लोकतंत्र का भविष्य नहीं है, बल्कि वर्तमान में भी इसकी एक महत्वपूर्ण आवाज है।”

असम विधानसभा अध्यक्ष श्री रणजीत कुमार दास ने भी विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनके प्रश्नों का उत्तर दिया और विधानसभा के भ्रमण को लोकतंत्र को प्रत्यक्ष रूप से कार्य करते हुए समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। श्री दास ने कहा, “किसी विधानमंडल का दौरा करना और उसके भीतर से उसकी कार्यप्रणाली को समझना एक विशेष अवसर है। आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि इतनी कम उम्र में आपको यह अवसर प्राप्त हुआ है। मुझे आशा है कि यह अनुभव आपको हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रति जागरूक, जिज्ञासु और सक्रिय बने रहने के लिए प्रेरित करेगा।”

युवा संपर्क कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को विधानसभा भवन का निर्देशित भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें दिल्ली विधानसभा की कार्यप्रणाली एवं उसके संस्थागत इतिहास से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों को “विठ्ठल भाई की गौरव गाथा” नामक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें श्री विठ्ठलभाई पटेल के जीवन, योगदान एवं संसदीय विरासत को रेखांकित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिक शिक्षा को कक्षा-कक्ष तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को विधायिका को एक जीवंत लोकतांत्रिक संस्था के रूप में प्रत्यक्ष अनुभव कराने तथा इसके संचालन से जुड़े लोगों के साथ सीधे संवाद का अवसर प्रदान करना था।

श्री विजेंद्र गुप्ता ने श्री रणजीत कुमार दास को दिल्ली विधानसभा में प्रौद्योगिकी एवं सतत विकास के क्षेत्र में किए जा रहे परिवर्तनों के बारे में भी जानकारी दी। इनमें विधानसभा की पूरी तरह पेपरलेस विधायी कार्यप्रणाली, पूरी तरह सौर ऊर्जा संचालित विधानसभा बनने की दिशा में जारी प्रयास तथा ‘विधान साथी’, विधानसभा का इन-हाउस AI-सक्षम प्लेटफॉर्म, शामिल हैं, जिसे विधायकों को विधायी सूचनाओं एवं जानकारी तक सुगम पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। श्री गुप्ता ने रेखांकित किया कि इन पहलों का उद्देश्य विधायी कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष एवं पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी बनाना तथा सदस्यों को उनके दायित्वों के निर्वहन में बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

विधायी विरासत के संरक्षण का विषय भी दोनों अध्यक्षों के बीच हुई चर्चा में प्रमुखता से रहा। श्री गुप्ता ने श्री दास को प्रस्तावित ‘ई-संग्रहालय’ के बारे में अवगत कराया। इसके अंतर्गत एक संग्रहालय तथा एक इमर्सिव लाइट एंड साउंड अनुभव विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जिसके माध्यम से दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही विधानसभा के अभिलेखीय एवं विधायी दस्तावेजों के डिजिटल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी गई। श्री गुप्ता ने असम विधानसभा अध्यक्ष को विधानसभा की दस्तावेजीकरण एवं प्रकाशन संबंधी पहलों से भी परिचित कराया तथा उन्हें “एक शताब्दी यात्रा” कॉफी टेबल बुक भेंट की, जिसमें दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक एवं संस्थागत यात्रा का विस्तृत वर्णन है। उन्होंने “विधान चेतना” के बारे में भी जानकारी दी, जो विधायी कार्यों, सुशासन, सार्वजनिक नीति एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं पर केंद्रित विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका है।

दोनों अध्यक्षों ने दिल्ली एवं असम विधानसभाओं के बीच और अधिक गहन संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसमें विधायी प्रक्रियाओं एवं कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान, शोध संबंधी पहल तथा ज्ञान एवं संसाधनों को साझा करना शामिल है, ताकि संसदीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाया जा सके।

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