नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026:
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एनआर-1 (NR-1) यूनिट, प्रशांत विहार ने दहेज हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शातिर फरलो जंपर देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। दोषी पिछले 2 साल से अधिक समय से जेल अधिकारियों को चकमा देकर फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कई बार अपने ठिकाने बदले और ऑटो चलाकर पहचान छिपाए रखी थी।
घटना की पृष्ठभूमि: पत्नी को छत से धक्का देकर उतारा था मौत के घाट
यह मामला सरिता विहार थाने में वर्ष 2009 में दर्ज दहेज हत्या (धारा 498A/304B IPC) से जुड़ा है।
- तारीख: 6 सितंबर 2009
- वारदात: मृतका के भाई पप्पू ने जब अपनी बहन के शरीर पर कई चोटों के निशान देखे और जीजा देवेंद्र से इसका कारण पूछा, तो आरोपी ने अवैध संबंध का आरोप लगाया। इसके बाद आरोपी देवेंद्र अपनी पत्नी को छत पर ले गया और उसे नीचे धक्का दे दिया। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने पर उसने दम तोड़ दिया।
- सजा: ट्रायल के बाद कोर्ट ने वर्ष 2012 में देवेंद्र को सश्रम आजीवन कारावास (Rigorous Life Imprisonment) की सजा सुनाई थी।
फरलो पर छूटते ही हो गया था फरार
जेल प्रशासन ने 8 फरवरी 2024 को दोषी देवेंद्र को 14 दिन की फरलो (Furlough) दी थी। अवधि समाप्त होने पर उसे जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वह आत्मसमर्पण करने के बजाय फरार हो गया और 2 साल से अधिक समय तक पुलिस को चकमा देता रहा।
क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन और गिरफ्तारी
गुप्त सूचना और टेक्निकल इनपुट्स के आधार पर एसीपी अशोक शर्मा के सुपरविजन और इंस्पेक्टर पुखराज के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें सब-इंस्पेक्टर राहुल, निरंजन सिंह, हेड कांस्टेबल मुकेश और विक्रांत शामिल थे।
- हेड कांस्टेबल मुकेश को सूचना मिली कि दोषी स्वरूप नगर में ठिकाना बदलकर रह रहा है।
- पुलिस टीम ने 6 सितंबर 2026 को स्वरूप नगर स्थित एक किराये के मकान पर जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।
दोषी का प्रोफाइल
- नाम: देवेंद्र सिंह (39 वर्ष), पुत्र राम स्वरूप
- मूल निवासी: जिला एटा, उत्तर प्रदेश (वर्तमान पता: स्वरूप नगर, दिल्ली)
- शिक्षा व पेशा: 5वीं तक पढ़ा-लिखा देवेंद्र दिल्ली में ऑटो रिक्शा चलाकर अपना जीवनयापन कर रहा था। जेल से भागने के बाद वह पहले लिबासपुर में रहा और बाद में पहचान छिपाकर स्वरूप नगर शिफ्ट हो गया था।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त (DCP) चंद्र कुमार सिंह ने पुष्टि की कि आरोपी को संबंधित विधिक औपचारिकताओं के बाद दोबारा जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।









