*मॉनसून एक्शन प्लान के अनुसार सभी ज़ोनो में नालों की सफ़ाई का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है-डॉ शैली ओबरॉय
*चार फ़ीट से ऊपर के नालों की सफ़ाई का कार्य 92-93 प्रतिशत व चार फीट से नीचे के नालों का कार्य 85 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।-डॉ शैली ओबरॉय
*जल भराव की समस्या से निपटने के लिए ‘क्विक रिपॉन्स टीम’का गठन, हर जोनके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त
*सभी ज़ोन में भी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं जो मॉनसून के दौरान स्थिति की निगरानी करेंगे। वार्ड लेवल पर ज़ोनल टीम भी बनायी गई है
*पिछले वर्ष जिन स्थानों पर अधिक जल भराव हुआ था,उन पर विशेष ध्यान – नेता सदन मुकेश गोयल
*नागरिकों से आग्रह जल भराव की समस्या होने पर कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज कराये और जल्द से जल्द समस्या का निदान होगा। -नेता सदन मुकेश गोयल
मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने आज नेता सदन मुकेश गोयल के साथ सिविक सेंटर में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि दिल्ली नगर निगम ने आगामी बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली है। मेयर ने कहा की पिछले एक महीने से हम लगातार अधिकारियों के साथ तैयारियों को लेकर बैठक कर रहे हैं। मॉनसून एक्शन प्लान पहले ही तैयार कर लिया गया था और उसके अनुसार अब सभी ज़ोन में युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि निगम दिल्ली में मानसून से पूर्व नालों की सफाई का काम तेज़ी से कर रहा है। निगम के अंतर्गत चार फ़ीट से ऊपर के 713 नाले हैं जिनकी लंबाई लगभग 460 किलोमीटर है व चार फीट से नीचे लगभग 21,000 नाले है जिसकी लंबाई लगभग 6600 किलोमीटर है।उन्होंने बताया कि निगम द्वारा दो फेज में नालों की सफ़ाई की जाती है ।पहले फ़ेज़ में मॉनसून से पहले नालों की सफ़ाई होती है और दूसरे फ़ेज़ में मॉनसून ख़त्म होने के बाद सफ़ाई का कार्य किया जाता है। पहले फ़ेज़ में चार फ़ीट से ऊपर के नालों की सफ़ाई का कार्य 92-93 प्रतिशत व चार फीट
से नीचे के नालों का कार्य 85 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त जल भराव की समस्या से निपटने के लिए ‘क्विक रिपॉन्स टीम’का गठन किया गया है। हर जोन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है , जिसकी ज़िम्मेदारी जोन में जल भराव वाले स्थानों को चिन्हित करना है, निगरानी करना और जलभराव की स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त इंतज़ाम करना होगा। पिछले वर्ष दिल्ली में जिन स्थानों पर जल भराव ज़्यादा हुआ था उन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मेयर ने बताया कि मानसून के मौसम में सभी स्थायी पंपिंग स्टेशनों पर 24×7 स्टाफ उपलब्ध रहेगा। निगम के पास कुल स्थायी पंप 70-80 पंप है और अस्थाई पंप 450-500 तक हैं, जो पूरी तरह से तैयार है। साथ ही हमारा सिविक सेंटर मुख्यालय में कंट्रोल रूम बिलकुल तैयार है। सभी ज़ोन में भी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं जो मॉनसून के दौरान स्थिति की निगरानी करेंगे। इसके अतिरिक्त वार्ड लेवल पर ज़ोनल टीम बनायी गई है जिसमें जेई,सफ़ाई कर्मचारी, नाला बेलदार तथा मेंटेनेंस व डेम्स विभाग के कर्मचारी होंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह मॉनसून की तैयारियों को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री सुश्री आतिशी व श्री सौरभ भारद्वाज के साथ भी बैठक की गई जिसमें विभिन्न एजेंसियों जैसे- डीडीए, पीडब्ल्यू, सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग आदि ने भाग लिया। दिल्ली में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करेगी।मेयर ने नागरिकों को आश्वासन दिया कि इस बार दिल्ली में जल भराव की स्थिति से निपटने के लिए निगम ने व्यापक प्रयास किए हैं और वे इस वर्ष मॉनसून का आनंद उठा सकेंगे।
नेता सदन, मुकेश गोयल ने बताया कि दिल्ली नगर निगम ने मॉनसून से पहले अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली है। पिछले वर्ष जुलाई के महीने में मॉनसून शुरू होते ही दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए थे। इस वर्ष जिन स्थानों पर जल भराव अधिक हुआ था उन परविशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से भी आग्रह किया कि उनके क्षेत्र में जल भराव की समस्या होने पर कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज कराये और जल्द से जल्द उनकी समस्या का निदान होगा। नागरिकों का सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली में अच्छे कार्य किए जा रहे हैं और और इस वर्ष नागरिकों को जलभराव की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। साथ ही हमारा जन स्वास्थ्य विभाग भी तैयार हैं। अगर
जलभराव की स्थिति हुई तो उन स्थानों पर हम कीटनाशक दवाई का छिड़काव भी करवाएंगे।
इसके अतिरिक्त मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने आज मॉनसून की तैयारियों की समीक्षा के लिए एमसीडी अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक के दौरान मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मॉनसून एक्शन प्लान के तहत मुख्य रूप से नालों की समय पर सफाई, जलभराव वाले हॉटस्पॉट की पहचान और जलभराव की घटनाओं की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनाने और टीमों के गठन जैसे प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिए की, बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति में जल निकासी के लिए त्वरित कार्रवाई हो ताकि नागरिकों को कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।



