अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर डीयू में किया 1 हजार लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास  

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*मन को स्थिर और शरीर को गतिमान करता है योग: कुलपति प्रो. योगेश सिंह

*प्रधानमंत्री के प्रयासों से 172 देशों ने किया भारतीय संस्कृति को स्वीकार: सांसद मनोज तिवारी

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में करीब एक हजार लोगों ने कुलपति प्रो. योगेश सिंह और स्थानीय सांसद मनोज तिवारी के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया। इस कार्यक्रम का आयोजन सुबह 6:00 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के खेल स्टेडियम परिसर के मल्टीपर्पज हॉल में किया गया था। इस अवसर पर अपने संबोधन में सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को दुनिया में पहचान मिली है। आज विश्व के 172 देशों ने योग के माध्यम से भारतीय संस्कृति को स्वीकार किया है। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने संबोधन में योग के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि योग मन को स्थिर और शरीर को गतिमान करता है।   

सांसद मनोज तिवारी ने योग दिवस कार्यक्रम के भव्य आयोजन के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि योग 10 वर्ष पहले ही शुरू हुआ है, लेकिन 10 वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2014 में हमारे प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए हर साल 21 जून को  ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने का निर्णय लिया था। मनोज तिवारी ने कहा कि दुनिया के 172 देशों ने भारत की प्राचीन संस्कृति को स्वीकार किया है; यह 172 देश हमारे मित्र देश हैं। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्ग आशीर्वाद देते हैं कि 100 साल जियो, लेकिन 100 साल जीने के लिए विशेष खानपान और जीवन शैली की जरूरत होती है। हमने एक कदम आगे बढ़ते हुए मोटे अनाज को खान-पान में लाने को बढ़ावा दिया और दुनिया ने मोटे अनाज का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष मनाया। सांसद ने कहा कि योग दिवस का कार्यक्रम दिखावे का नहीं है। हम धन्यवाद देना चाहते हैं देश के प्रधानमंत्री को कि उन्होंने देश और दुनिया को 100 साल जीने का रास्ता दिखाया।

डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 21 जून का दिन साल का सबसे बड़ा दिन होता है, इसीलिए 21 जून को योग दिवस के रूप में चुना गया है। उन्होंने कहा कि 10 सालों में योग के प्रति दुनिया में माहौल बदला है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) 2024 के थीम “स्वयं और समाज के लिए योग” को लेकर कुलपति ने कहा कि यह बहुत ही अच्छा थीम है। यह मन में एक अच्छी भावना लेकर आता है और समझ को विकसित करने  का काम करता है। प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि योग मन को स्थिर और शरीर को गतिमान करता है, जबकि सामान्य ज़िंदगी में इसका उलट होता है, मन अधिक भागता है और अगर हम कोई शारीरिक अभ्यास नहीं करते तो शरीर सिथिल पड़ जाता है। कुलपति ने दीनदयाल उपाध्याय की एकात्मक मानववाद की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि शरीर के चार हिस्से हैं ‘शरीर, मन बुद्धि और आत्मा’। व्यक्ति के लिए इनका सामंजस्य बहुत आवश्यक है, और योग करने से ये सामंजस्य बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि बुद्धि पर योग भी काम करता है और शिक्षा भी, इसलिए अगर योग के कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों में होते हैं तो इसका प्रभाव कई गुणा ज्यादा होता है।

कार्यक्रम के दौरान योग गुरु सुरक्षित गोस्वामी ने विभिन्न योग क्रियाओं से उपस्थित लोगों को योगाभ्यास करवाया। उन्होंने कहा कि योग होता है तो रोग नहीं होता, और रोग तभी होता है जब जीवन में योग नहीं होता। उन्होंने बताया कि योग के 84 लाख आसन हैं। कार्यक्रम के अंत में वरुण आर्य ने योग के साथ आयुर्वेद की भी जानकारी दी। इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो. बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर के निदेशक प्रो. श्री प्रकाश सिंह, रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता, एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो, गांधी भवन के निदेशक प्रो. केपी सिंह, योग गुरु सुरक्षित गोस्वामी व वरुण आर्य के अतिरिक्त एनसीसी अधिकारी डॉ संजय शर्मा एवं एनएसएस अधिकारी डॉ नरेंद्र बिश्नोई सहित अनेकों अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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