फिल्म समीक्षा: रिटर्न ऑफ द जंगल (Return of the Jungle)
रेटिंग: ★★★☆☆ (3/5 स्टार)
सेंसर: यू (U) | अवधि: 124 मिनट
लेखक, निर्माता और निर्देशक: वैभव कुमारेश
भूमिका
भारतीय एनीमेशन जगत में जब भी कुछ नया और अनूठा प्रयोग होता है, तो सिनेमा प्रेमियों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। देश-विदेश में अपनी एक अलग और खास पहचान बना चुके प्रख्यात एनीमेटर वैभव कुमारेश के निर्देशन में बनी एनिमेटिड फिल्म “रिटर्न ऑफ द जंगल” भारतीय एनीमेशन इंडस्ट्री को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का दम रखती है। हाल ही में इस फिल्म को ‘मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ (MIFF) में पेश किया गया था, जहां समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने ही इसकी दिल खोलकर सराहना की।
कहानी का ताना-बाना (स्टोरी प्लॉट)
फिल्म की कहानी केंद्रीय विद्यालय के कुछ स्कूली बच्चों के इर्द-गिर्द घूमती है। यह उनके जीवन, अटूट विश्वास और उनके रास्ते में आने वाली चुनौतियों को खेल व विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से बेहद खूबसूरती से पेश करती है।
- मुख्य मुकाबला: स्कूल में ‘राहुल मल्होत्रा’ नाम का एक छात्र है, जो खुद को किसी ‘स्पाइडर-मैन’ से कम नहीं समझता और स्कूल की हर प्रतियोगिता को जीतने का हुनर रखता है। वहीं दूसरी तरफ, दूसरी क्लास के छात्र हैं, जो इस बार ‘छोटू’ के नेतृत्व में स्कूल के सभी मुकाबलों में हिस्सा लेने का बड़ा फैसला करते हैं।
- बचपन के रंग: फिल्म में फैशन शो से लेकर रोमांचक क्रिकेट मैच तक के कई दिलचस्प मुकाबले दिखाए गए हैं। इन प्रतियोगिताओं के बीच बच्चों की पक्की दोस्ती, आपसी नोकझोंक और उनके संघर्ष को बहुत ही मासूमियत से पर्दे पर उतारा गया है।
- ‘थाथा’ का मार्गदर्शक किरदार: इन बच्चों के साथ है ‘थाथा’ का आशीर्वाद। ‘थाथा’ का किरदार पारंपरिक पंचतंत्र शैली की कहानियों से प्रेरित है, जो हर मुश्किल वक्त में बच्चों का हौसला बढ़ाता है और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की सही सीख देता है।
तकनीकी पक्ष और वीएफएक्स (VFX)
तकनीकी तौर पर फिल्म काफी मजबूत नजर आती है। फिल्म में वीएफएक्स (VFX) का काम बेहद अव्वल दर्जे का है, जो दृश्यों को सजीव और आकर्षक बनाता है। वैभव कुमारेश ने एनीमेशन की बारीकियों पर बेहतरीन काम किया है। यह फिल्म न केवल स्कूली बच्चों को एक नई दिशा देती है, बल्कि हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति और किसी भी खेल में होने वाली ‘हार-जीत’ के अनुभवों को किस तरह सकारात्मक रूप से लिया जाए, इसे बड़े पर्दे पर दिखाने का एक बेहद नेक और सराहनीय प्रयास है।

15 साल की कड़ी मेहनत और लंबा संघर्ष
इस फिल्म की सबसे बड़ी और हैरान कर देने वाली खासियत इसका निर्माण काल है। बिना किसी स्थापित बड़े स्टार कास्ट के, करीब दो घंटे की इस एनिमेटिड फिल्म को पूरा करने में निर्माता और उनकी पूरी टीम को लगभग 15 साल का लंबा वक्त लगा है। यह फिल्म पूरी टीम के अटूट धैर्य और कड़े संघर्ष का एक बेमिसाल परिणाम है। इतने लंबे समय तक एक विजन पर टिके रहना और उसे स्क्रीन पर उतारना, एनीमेशन जगत में युवा फिल्म मेकर्स के लगातार बढ़ रहे आत्मविश्वास का साफ संकेत है।
फाइनल वर्डिक्ट (निष्कर्ष)
‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ केवल छोटे बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बनाई गई एक बेहद साफ-सुथरी और संदेशपरक फिल्म है। भले ही इसकी गति कहीं-कहीं थोड़ी धीमी लगती हो, लेकिन इसकी नीयत और प्रस्तुति लाजवाब है। इस वीकेंड अपने घर के ‘सोनू-मीनू’ (बच्चों) को साथ लें और नजदीकी सिनेमाघरों में जाकर इस बेहतरीन प्रयास को जरूर देखें। यकीनन, यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ आपके परिवार की कसौटी पर खरी उतरेगी।




