जमानत अर्जी खारिज होने के बाद संजय सिंह शराब घोटाले के मुख्य रिसीवर के रूप में चिंहित हो गए हैं – वीरेंद्र सचदेवा

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*कोर्ट द्वारा संजय सिंह की जमानत खारिज करने और सिसौदिया की हिरासत बढ़ाने से पता चलता है कि आप नेताओं का यह आरोप कितना बेबुनियाद है कि ईडी का मामला राजनीति से प्रेरित है — वीरेंद्र सचदेवा

*जिस तरह से शराब घोटाले में किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल रही है और अरविंद केजरीवाल ईडी के नोटिस से बच रहे हैं, उससे यह तय हो गया है कि शराब घोटाले के पैसे के अंतिम लाभार्थी केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ही हैं — दिल्ली भाजपा अध्यक्ष

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि जब से शराब घोटाले का पता चला है तब से दिल्ली भाजपा कह रही है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया शराब घोटाले के मास्टर माइंड हैं लेकिन संजय सिंह ही इस घोटाले के सूत्रधार थे। संजय सिंह ने ही शराब घोटाले में शामिल शराब ठेकेदारों और अन्य शामिल लोगों से किक बैक पैसा एवं रिश्वत वसूली।

एक आरोपी के सरकारी गवाह बन जाने और धन प्राप्तकर्ता के रूप में संजय सिंह का नाम बताए जाने के बाद उनकी नापाक भूमिका की पुष्टि हो गई है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ईडी ने अदालत में स्पष्ट रूप से कहा है कि यह संजय सिंह और उनके कर्मचारी ही थे जिन्होंने बार मालिकों और होटल मालिकों के साथ बैठकें कीं और न केवल रिश्वत के पैसे बल्कि आम आदमी पार्टी के लिए चंदा भी इकट्ठा किया।

सरकारी गवाह के बयान के माध्यम से यह व्यापक रूप से ज्ञात है कि यह संजय सिंह ही थे जिन्होंने न केवल विजय नैय्यर और मनीष सिसौदिया के साथ बल्कि सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ भी शराब व्यापारियों की बैठकें आयोजित कीं।

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि आज उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद संजय सिंह शराब घोटाले के पैसे के मुख्य रिसीवर के रूप में चिंहित हो गए हैं।

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा है कि आज कोर्ट ने न केवल संजय सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी, बल्कि मनीष सिसौदिया की हिरासत भी लगभग एक महीने के लिए बढ़ा दी, जिससे पता चलता है कि आप नेताओं का यह आरोप कितना बेबुनियाद है कि ई.डी. का मामला राजनीति से प्रेरित है।

सचदेवा ने कहा है कि जिस तरह से शराब घोटाले में किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल रही है और अरविंद केजरीवाल ई.डी. के नोटिस से बच रहे हैं, उससे यह तय हो गया है कि शराब घोटाले के पैसे से केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ही सबसे बड़े लाभार्थी हैं।

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