- दिल्लीवाले हर साल 2.07 लाख करोड़ रुपए इनकम टैक्स देते हैं, फिर भी केंद्र सरकार उनके हक का पैसा नहीं दे रही है- सौरभ भारद्वाज
- मनीष सिसोदिया के बाद वित्त मंत्री आतिशी भी केंद्र से लगातार दिल्ली के हक का पैसा मांग रही हैं, लेकिन कभी नहीं मिला- सौरभ भारद्वाज
- केंद्र सभी अर्बन बॉडी को आबादी के अनुसार पैसा देता है, पर देश की राजधानी दिल्ली में एमसीडी को एक रुपए नहीं दिया- सौरभ भारद्वाज
- दिल्ली की शहरी आबादी के हिसाब से केंद्र सरकार को दिल्ली नगर निगम को 5243 करोड़ रुपए देने चाहिए- सौरभ भारद्वाज
- दिल्ली की जनता 2.07 लाख करोड़ इनकम टैक्स के अलावा 25 हजार करोड़ रुपए सीजीएसटी भी केंद्र सरकार को देती है- डॉ. शैली ओबेरॉय
- मैंने बजट से पहले वित्त मंत्री को पत्र लिखकर एमसीडी को 10 हजार करोड़ रुपए देने की मांग की थी, लेकिन नहीं मिला- डॉ. शैली ओबेरॉय
- भाजपा शासित केंद्र सरकार और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से निवेदन, दिल्ली को उसके हक का पैसा जल्द जारी करें- डॉ. शैली ओबेरॉय
दिल्ली सरकार ने बजट में दिल्लीवालों के साथ भेदभाव करने पर केंद्र की भाजपा सरकार तीखा हमला बोला है। शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज का कहना है कि केंद्र सरकार दिल्ली पर अपना हक तो जमा रही है, लेकिन अपना फर्ज नहीं निभा रही है। दिल्लीवाले हर साल 2.07 लाख करोड़ रुपए आयकर देते हैं, तब भी केंद्र दिल्लीवालों को उनके हक का पैसा नहीं दे रहा है, जबकि मनीष सिसोदिया के बाद मौजूदा वित्त मंत्री आतिशी लगातार केंद्र से दिल्ली के हिस्से का पैसा मांग रही हैं। केंद्र देश के सभी अर्बन बॉडीज को आबादी के अनुसार पैसा देता है, लेकिन एमसीडी एक रुपए नहीं दिया, जबकि केंद्र को शहरी आबादी के हिसाब से एमसीडी को 5243 करोड़ रुपए देने चाहिए। उधर, एमसीडी की मेयर डॉ. शैली ओबेरॉय ने भाजपा शासित केंद्र सरकार और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से दिल्ली को उसके हक का पूरा पैसा जल्द जारी करने का अनुरोध किया है।
दिल्ली सचिवालय में प्रेसवार्ता कर शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बजट पेश होने से पहले ही दिल्ली की वित्त मंत्री अतिशी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया था कि इस बार केंद्रीय बजट में दिल्ली के लोगों के लिए भी कुछ प्रावधान किया जाए। क्योंकि पूरे देश में दिल्ली के लोग इनकम टैक्स देने के मामले में दूसरे स्थान पर आते हैं। दिल्ली के लोग लगभग 2,07,000 करोड रुपए प्रति वर्ष इनकम टैक्स के रूप में केंद्र सरकार को देते हैं। पूरे देश के सभी राज्यों से इसी प्रकार इनकम टैक्स इकट्ठा होकर केंद्र सरकार को जाता है और फिर केंद्र राज्यों में विकास कार्य के लिए उस इनकम टैक्स के रूप में एकत्रित धन में से कुछ पैसा राज्यों को विकास कार्य के लिए दिया जाता है। जितना टैक्स दिल्ली के लोग प्रतिवर्ष केंद्र सरकार को देते हैं, उस हिसाब से 10 हजार करोड रुपए से भी अधिक केंद्र सरकार द्वारा दिल्लीवालों और दिल्ली के विकास के लिए दिया जाना चाहिए।
मंत्री सौरभ भारद्वाज में बताया कि अलग-अलग राज्यों में जितने भी शहरी स्थानीय निकाय (अर्बन लोकल बॉडीज) होते हैं और उन शहरी स्थानीय निकायों में जितनी आबादी होती है, उसके आधार पर केंद्र सरकार एक राज्य को अनुदान देती है। यहां हम इनकम टैक्स की बात नहीं कर रहे हैं, अपितु केवल उस हक की मांग कर रहे हैं, जो दिल्ली नगर निगम को एक शहरी स्थानीय निकाय होने के नाते मिलना चाहिए। मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बीते वर्ष केंद्र सरकार द्वारा ऑर्डिनेंस लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए उपराज्यपाल को शक्तियां दिए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त केंद्र सरकार ने इस ऑर्डिनेंस को पास करने के दौरान दिल्ली के संबंध में बड़ी-बड़ी बातें कहीं थी। केंद्र ने कहा था कि दिल्ली केवल दिल्लीवालों की नहीं पूरे देश की है। दिल्ली में कुछ भी होता है तो उससे पूरे देश की साख पर असर पड़ता है। दिल्ली में छोटी सी घटना भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की घटना बन जाती है। यदि दिल्ली के बारे में इतनी बड़ी-बड़ी बातें की गई थी और दिल्ली केंद्र सरकार के लिए इतना महत्व रखती है, तो दिल्ली के विकास के लिए केंद्र सरकार को पर्याप्त पैसा भी देना चाहिए। दिल्ली के बारे में केवल बड़ी-बड़ी बातें करने से दिल्ली का विकास नहीं होगा।
कुछ आंकड़े साझा करते हुए मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बताया कि 2021 से लेकर 2026 तक केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश के शहरी स्थानीय निकायों को 1,21,000 करोड रुपए का अनुदान दिया गया। 2011 की जनगणना की रिपोर्ट के आधार पर इसकी गणना (कैलकुलेट) की जाती है। 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार जो देश की शहरी आबादी है वह लगभग 37.7 करोड़ है और इसी जनगणना रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की आबादी लगभग 1 करोड़ 63 लाख है। केंद्र सरकार की ओर से शहरी स्थानीय निकायों को आबादी के अनुसार 3211 रुपए प्रति व्यक्ति अनुदान दिया जाता है। इस हिसाब से दिल्ली की आबादी को देखते हुए केंद्र को लगभग 5243 करोड रुपए देना चाहिए। यह दिल्ली की शहरी स्थानीय निकाय का अधिकार है। हर राज्य की शहरी स्थानीय निकाय को यह पैसा मिलता है। उन्होंने कहा कि हम दिल्ली के लिए किसी स्पेशल ट्रीटमेंट की बात नहीं कर रहे, बल्कि उस हक की बात कर रहे हैं, जो अन्य राज्यों की भांति दिल्ली के शहरी स्थानीय निकाय को भी मिलना चाहिए।
मंत्री सौरभ भारद्वाज ने प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि केवल दिल्ली के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करने से कोई विकास नहीं होने वाला। मैं अनुरोध करता हूं कि दिल्ली के शहरी स्थानीय निकायों का जो अधिकार अन्य राज्यों की भांति बनता है, वह पैसा दिल्ली नगर निगम को दिया जाए, ताकि दिल्ली में बड़े स्तर पर विकास कार्य किया जा सके। दिल्ली का एक मंत्री होने के नाते मैं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी को इस संबंध में एक पत्र लिखूंगा और उनसे भी आग्रह करूंगा कि दिल्ली की जनता और दिल्ली को यह पैसा दिया जाए, ताकि दिल्ली में दोगुनी रफ्तार के साथ विकास कार्य किया जा सके।
उधर, एमसीडी की मेयर डॉ. शैली ओबेरॉय ने कहा कि 23 जुलाई को केंद्र सरकार ने देश का बजट पेश किया था। इस बजट से पहले मैंने देश की वित्त मंत्री को पत्र लिखकर एमसीडी के लिए बजट की मांग की थी। केंद्र सरकार के बजट में देश के हर राज्य को धनराशि आवंटित की जाती है। साथ ही विभिन्न शहरी और स्थानीय इकाइयों के निगमों को भी पैसा दिया जाता है। लेकिन दिल्लीवासियों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि केंद्र सरकार ने आज तक कभी भी एमसीडी को कोई पैसा नहीं दिया है। इसलिए मैंने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर मांग की थी कि दिल्ली नगर निगम को इस साल 10 हजार करोड़ रुपये दिए जाएं। जिसमें से 5 हजार करोड़ रुपये दिल्ली की साफ-सफाई, 3 हजार करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण और 2 हजार करोड़ रुपये पार्कों के सौंदर्यीकरण पर खर्च किए जाएंगे। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने हमेशा की तरह दिल्लीवालों के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए इस बार भी एमसीडी को कोई पैसा नहीं दिया।
डॉ. शैली ओबेरॉय ने कहा कि दिल्लीवासी केंद्र सरकार को हर साल सबसे अधिक टैक्स देते हैं। दिल्ली की पढ़ी-लिखी समझदार जनता लगभग 2.07 लाख करोड़ रुपए इनकम टैक्स जमा कराती है। इसके अलावा सीजीएसटी के तहत केंद्र को 25 हजार करोड़ रुपए दिए जाते हैं। जब दिल्ली की जनता जिम्मेदारी से केंद्र सरकार को टैक्स देती है, तो केंद्र सरकार क्यों दिल्ली के विकास और जनता के कार्यों के लिए यह पैसा नहीं देती है? मैं एक बार फिर से भाजपा शासित केंद्र सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह करती हूं कि वे एमसीडी को जल्द से जल्द यह पैसा दें। अभी मानसून का मौसम है और दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत है। दिल्ली की जनता बहुत जिम्मेदार है। केंद्र शासित राज्य होने के नाते, यहां की जनता के प्रति केंद्र की भाजपा सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है। मैं उम्मीद करती हूं कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द एमसीडी को 10 हजार करोड़ रुपए देगी ताकि हम इसे दिल्ली के विकास में खर्च कर सकें।


