गैर-संचारी रोगों के मुद्दे पर विज्ञान और मीडिया को एकजुट करने के लिए दिल्ली में हुई गोलमेज़ चर्चा

Listen to this article

रीच REACH (Resource Group for Education and Advocacy for Community Health) ने गुरुवार, 1 अगस्त 2024 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गैर-संचारी रोगों के मसले पर विज्ञान जगत एवं मीडिया जगत के मिलकर काम करने की अहमियत को लेकर एक गोलमेज़ चर्चा की मेज़बानी की जिसका शीर्षक था ’’नॉन-कम्यूनिकेबल डिसीसिज़ (एनसीडी): ब्रिंगिंग साइंस एंड मीडिया टूगैदर’’। इस महत्वपूर्ण आयोजन में विविध पक्षों ने भाग लिया और गैर-संचारी बीमारियों के बढ़़ते बोझ के विषय पर चर्चा की तथा इस जन स्वास्थ्य समस्या का प्रसार घटाने के प्रभावी उपायों पर विचार मंथन किया। इस चर्चा का प्रमुख उद्देश्य यह था कि जागरुकता को बढ़ाया जाए और स्वास्थ्य पेशेवरों, नीति निर्माताओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों के बीच तालमेल कायम किया जाए।

इस गोलमेज़ चर्चा में रीच अलाईज़ के प्रोजेक्ट लीड एवं वरिष्ठ सलाहकार श्री सुब्रत मोहंती ने स्वागत भाषण दिया और उन्होंने रीच व उसके मिशन से उपस्थित जनों को परिचित कराया। रीच में वरिष्ठ मीडिया व सम्प्रेषण सहयोगी श्री मयंक मोहंती ने पूरे भारत में जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे रीच के काम के बारे में जानकारी दी तथा मीडिया ऐंगेजमेंट प्रोग्राम से परिचय कराया। उन्होंने बताया कि यह निर्लाभकारी संस्था भारत में सभी के लिए एक समान स्वास्थ्य के ध्येय पर अग्रसर है। उन्होंने कहा, ’’स्वास्थ्य के मामले में सटीक मीडिया रिपोर्टिंग अत्यंत अहम है, खास कर तब जब हमें गैर-संचारी रोगों के फैलाव से मुकाबला करना हो। सटीक व साक्ष्य-आधारित सूचना प्रदान करके पत्रकार पेचीदा स्वास्थ्य मसलों को समझाने, स्वास्थ्यकर व्यवहार को बढ़ावा देने और गैर-संचारी रोगों के असर को घटाने के अभियानों/पहलों में सहायता कर सकते हैं। हमारी जिम्मेदारी यह है कि हम यह सुनिश्चित करें कि जनता को विश्वसनीय सूचना मिले ताकि वे सूचना युक्त निर्णय ले सकें और इसके परिणामस्वरूप हमारा समाज स्वस्थ बनेगा।’’

पहले सत्र का शीर्षक था ’’कम्यूनिकेटिंग इफेक्टिवलीः मैसेजिंग फॉर एनसीडी’’ इसमें हिन्दुस्तान के प्रबंध सम्पादक श्री प्रताप सोमवंशी ने गैर-संचारी रोगों से संबंधित जनता की धारणाओं व नीतियों को आकार देने में मीडिया की भूमिका के बारे में उपस्थित जनों को जानकारी दी। उन्होंने कहा, ’’आज के समय में स्वास्थ्य रिपोर्टिंग गैर-संचारी बीमारियों के बारे में जन जागरुकता उत्पन्न करने में अहम भूमिका निभाती है। सटीक एवं जानकारीपरक पत्रकारिता लोगों की गलतफहमियों एवं अफवाहों को दूर करने में मददगार साबित होगी इस तरह समाज में भय नहीं फैलेगा और रोकथाम के उपायों के महत्व को प्रकाश में लाया जाएगा, विशेषकर गैर-संचारी बीमारियों के मामले में। हम इन मुद्दों पर प्रकाश डाल कर जानकारीपूर्ण निर्णय प्रक्रिया को प्रोत्साहित कर सकते हैं तथा एक सेहतमंद एवं सूचना से लैस समाज की रचना कर सकते हैं।’’

अगले सत्र का शीर्षक था ’’अंडरस्टैंडिंग एनसीडी इन इंडिया’’ इसमें चर्चा का अवलोकन प्रस्तुत किया गया जिसने इस आयोजन की कार्यवाही की दिशा तय की। इस सत्र में डॉ सुनीला गर्ग ने एक जानकारीपूर्ण प्रेज़ेंटेशन दी, आप मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में निदेशक-प्रोफेसर तथा कम्यूनिटी मेडिसिन की प्रमुख हैं। प्रेज़ेंटेशन के बाद अनुभवी ऐंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ बीना बंसल उनके साथ जुड़ीं और एक शिक्षाप्रद बातचीत हुई। डॉ गर्ग ने बतौर डॉक्टर और साथ ही जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ के तौर पर अपनी दोहरी भूमिकाओं के आधार पर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा, ’’गैर-संचारी रोगों के फैलाव को रोकने के लिए बीमारी की शीघ्र पहचान, निवारक स्वास्थ्य सेवाएं तथा जीवनशैली परिवर्तन पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। हमें लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधियों एवं धूम्रपान त्यागने की अहमियत पर शिक्षित करना होगा। इसके अलावा, रोगी देखभाल में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से क्रोनिक स्थितियों के मैनेजमेंट में बहुत सुधार किया जा सकता है। हैल्थकेयर ईकोसिस्टम के लिए यह बहुत अहम है कि निवराक एवं प्रोत्साहक उपाय अमल में लाए जाएं जिससे की दीर्घ-कालिक सेहत एवं कल्याण को बढ़ावा दिया जा सके।’’

डॉ बंसल को कई वर्षों का अनुभव है और वह योग्य क्लीनिशियन हैं; उन्होंने इस गोलमेज़ चर्चा में कहा, ’’देखभाल के नेटवर्क से कोई पीछे न छूट जाए यह सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम-आधारित दृष्टिकोण की जरूरत है। रोकथाम, शीघ्र डायग्नोसिस व प्रभावी उपचार योजनाओं पर ध्यान देकर हम बीमारियों के असर को बड़े पैमाने पर घटा सकते हैं और बड़ी तादाद में लोगों की जिंदगी की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। हर किसी के लिए यह अहम है वह सेहत के कारोबारी निर्धारकों के बारे में जागरुक रहे तथा पर्यावरणीय, सामाजिक व आर्थिक स्थितियों को स्वास्थ्य के फैसलों में शामिल किया जाए ताकि लोग अपनी सेहत को लेकर सक्रिय व सचेत रहें। साक्ष्य आधारित अभ्यासों पर अपनी ऊर्जा लगाकर, स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाकर और रोगी-केन्द्रित देखभाल द्वारा हम इन क्रोनिक स्थितियों का बोझ घटा सकते हैं और समग्र स्वास्थ्य परिणामों में सुधार कर सकते हैं।’’

तीसरे सत्र का शीर्षक था ’’रिपोर्टिंग रियलिटीज़ इन हैल्थकेयर’’, इसकी अगुआई जानेमाने जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ रजनीकांत श्रीवास्तव ने किया जो ICMR-RMRC, GKP के पूर्व निदेशक तथा नीति व सम्प्रेषण प्रमुख हैं। डॉ रजनीकांत ने गैर-संचारी रोगों के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया तथा इस मुद्दे से निपटने के लिए बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता को समझाया। उन्होंने कहा, ’’इसमें कोई दोराय नहीं है कि गैर-संचारी बीमारियों के फैलाव से मुकाबले के लिए स्पष्ट व असरदार तरीके से संदेश पहुंचाना महत्वपूर्ण है। सटीक सूचना देकर और स्वास्थ्यकर जीवनशैली को बढ़ावा देकर हम लोगों को सशक्त कर सकते हैं कि वे अपनी सेहत को अपने काबू में रख सकें। मीडिया और वैज्ञानिक समुदाय को साथ मिलकर काम करना होगा ताकि जानकारियों का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। सही तरीके संदेश देकर बर्ताव में सकारात्मक बदलावों को प्रेरित किया जा सकता है, क्रोनिक बीमारियों का जोखिम घटाया जा सकता है और अंततः सभी के लिए एक स्वास्थ्यकारी समाज की रचना की जा सकती है।’’

तकनीकी सत्रों के पश्चात् कथक नृत्यांगना और ओवेरियन कैंसर सर्वाइवर अलकनंदा दास ने अपना प्रेरणास्पद अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ना और उनके सपोर्ट सिस्टम ने किस तरह हालात से उबरने में उन्हें मदद दी।

सभी सत्रों के बाद पत्रकारों और रीच मीडिया फैलोज़ ने खुली चर्चा की जिसमें मेडिकल और मीडिया, दोनों क्षेत्रों से आए सवालों एवं सुझावों को शामिल किया गया। इस चर्चा में सटीक रिपोर्टिंग, नैतिक विचार के महत्व तथा सेहत के मसलों पर पत्रकारों की निरंतर शिक्षा की जरूरत पर बल दिया गया। इस जीवंत बातचीत से उपस्थित जनों को सवाल पूछने, राय साझा करने और पैनलिस्टों के साथ अर्थपूर्ण चर्चाओं में शिरकत करने का अवसर प्राप्त हुआ; तत्पश्चात् धन्यवाद प्रस्ताव दिया गया। इस गोलमेज़ चर्चा में 30 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए जो हिन्दी व अंग्रेज़ी के प्रमुख प्रकाशनों जैसे पंजाब केसरी, अमर उजाला, न्यूज़18 हिन्दी डिजिटल, लाईव मिंट व दैनिक भास्कर से थे, इनमें डिजिटल व प्रिंट दोनों माध्यमों के पत्रकार थे। यह दर्शाता है कि पत्रकार समुदाय स्थानीय और व्यापक स्तर पर गैर-संचारी रोगों के बोझ को कम करने में दिलचस्पी रखता है और इस उद्देश्य हेतु समर्पित है।

Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *