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भारत को ऊर्जा और जैविक खाद के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज आईआईटी दिल्ली परिसर में “स्वदेशी ऊर्जा एवं खाद आत्मनिर्भरता अभियान” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह अभियान स्वदेशी शोध संस्थान, उन्नत भारत अभियान, बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र (BDTC), आईआईटी दिल्ली तथा गो सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बायोगैस आधारित ऊर्जा उत्पादन और जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर आयातित ईंधन व रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना तथा ग्रामीण भारत को ऊर्जा और कृषि में आत्मनिर्भर बनाना है। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा और खाद आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। बायोगैस तकनीक स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा के साथ किसानों को उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद भी देती है, जिससे लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण होता है।

कार्यक्रम में अभियान के प्रथम चरण की कार्ययोजना रखी गई, जिसके तहत मार्च 2027 तक उत्तर प्रदेश में एक लाख बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इससे किसान और ग्रामीण परिवार अपनी ऊर्जा व जैविक उर्वरक जरूरतें स्वयं पूरी कर सकेंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, उद्यमिता और सतत विकास को गति मिलेगी।

कार्यशाला में देशभर से वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, उद्यमी, नीति-निर्माता और संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बायोगैस तकनीक के प्रसार, व्यवहारिक चुनौतियों, आधुनिक समाधान, वित्तीय मॉडल और बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन की रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि बायोगैस संयंत्र तकनीकी रूप से सरल, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, पर्यावरण अनुकूल और कम रखरखाव वाले हैं। इनके व्यापक उपयोग से ऊर्जा संकट का समाधान, जैविक खेती को बढ़ावा और किसानों की आय में वृद्धि संभव है।

आयोजकों ने सभी संस्थानों, सामाजिक संगठनों, कृषि विशेषज्ञों और नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। यह पहल प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास के संकल्प को मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

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